Monday, July 7, 2014

Yaadein

वक़्त की धूल से लिपटी एक किताब मिली 
धूल हटा के देखा तो यादों की किताब मिली
सोचा साफ़ करके उसको वापस रख दू 
पर दिल ने ना जाने उसको खोलने की इच्छा ज़ाहिर की 

खोला तो कुछ अच्छे बुरे पल थे 
कुछ खट्टे तो कुछ मीठे पल थे
कुछ ज़िन्दगी के वो पन्ने थे जो कभी नहीं खुलेंगे 
पर यादों में जरूर नज़र आएंगे 

गुजरते गुजरते गुजरी हुई  पूरी ज़िन्दगी नज़र आई 
कुछ सीख नज़र आई तो कुछ रिश्ते नज़र आये 
अच्छे पल की उम्मीद भी नज़र आई 
एक अच्छी ज़िन्दगी की झलक नज़र आई
और यूँ यादों की किताब की कहानी नज़र आई...

कृतिका गौड़