वक़्त की धूल से लिपटी एक किताब मिली
धूल हटा के देखा तो यादों की किताब मिली
सोचा साफ़ करके उसको वापस रख दू
पर दिल ने ना जाने उसको खोलने की इच्छा ज़ाहिर की
खोला तो कुछ अच्छे बुरे पल थे
कुछ खट्टे तो कुछ मीठे पल थे
कुछ ज़िन्दगी के वो पन्ने थे जो कभी नहीं खुलेंगे
पर यादों में जरूर नज़र आएंगे
गुजरते गुजरते गुजरी हुई पूरी ज़िन्दगी नज़र आई
कुछ सीख नज़र आई तो कुछ रिश्ते नज़र आये
अच्छे पल की उम्मीद भी नज़र आई
एक अच्छी ज़िन्दगी की झलक नज़र आई
और यूँ यादों की किताब की कहानी नज़र आई...
कृतिका गौड़
कृतिका गौड़